शिक्षक दिवस कविता: पहले गुरु मां-बाप, फिर शिक्षक
शिक्षक दिवस पर यह कविता बताती है कि जीवन में पहले गुरु मां-बाप होते हैं, फिर शिक्षक हमें ज्ञान, संस्कार और सफलता की राह दिखाते हैं।
माँ की गोद में पहला सबक,
प्यार से लिखी किताब,
पिता के अनुशासन में छिपा,
जीवन का सच्चा जवाब।
माँ–बाप हैं प्रथम गुरु,
संसार का देते ज्ञान,
चलना, बोलना, पहचानना,
करते हैं आसान।
फिर आता है जीवन में,
शिक्षक का महान स्वरूप,
जो अंधकार मिटा देता,
बना देता है ज्ञान का दीप।
शिक्षक सिर्फ पढ़ाते ही नहीं,
संस्कार भी सिखलाते हैं,
कैसे बने अच्छा इंसान,
ये राह हमें दिखलाते हैं।
माँ–बाप दें जीवन का बीज,
शिक्षक सींचें जल-सा,
दोनों मिलकर गढ़ते हैं,
मानव को उत्तम फल-सा।
इसलिए नमन है माँ–बाप को,
और शिक्षक को प्रणाम,
इनके बिना अधूरा है,
हर जीवन, हर इंसान।












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