गर्मी की छुट्टियाँ ख़त्म हुईं
गर्मी की छुट्टियाँ ख़त्म होते ही बच्चों के मन में उदासी और स्कूल की नई शुरुआत का मिला-जुला एहसास होता है। यह कविता उसी पल को बयां करती है।
छुट्टियाँ आईं धूप संग लहराईं,
हर दिन मस्ती की बारात लाई।
आम के पेड़ों की मीठी छाया,
दादी की बातों में सपना आया।
सुबह देर तक सोने की आदत,
न दुआर का घंटा, न कोई क़ायदा।
खेल-खिलौने, हँसी की टोली,
दिन भर जैसे चलती हो होली!
पर अब सूरज बोला धीरे,
“कल से फिर से स्कूल हैं तेरे।”
कापी-किताबें बुला रहीं हैं,
यादें सारी सजा रहीं हैं।
थोड़ा सा मन मेरा उदास है,
पर नई क्लास का भी तो एहसास है।
दोस्त मिलेंगे, बातें होंगी,
खुशियों की फिर बौछारें होंगी।
छुट्टियाँ तो हर साल आएंगी,
मगर ये क्लास अब ना दोहराएंगी।
चलो मुस्कुरा के फिर से चलें,
ज्ञान की राहों में साथ चलें।












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