पढ़े-लिखे परिंदे हैं, शहर की चारदीवारी में,नौ से छह की ड्यूटी, मन उलझा है बेचारी में। दिल तो गांव में…
इस पेड़ पर छोटी कविता में जानें कैसे पेड़ हमारे जीवन का आधार हैं, जो स्वच्छ वायु, आक्सीजन, और हरियाली…
हम सब मिलकर करें प्रतिज्ञा, सपनों को साकार करें। साथ चलें, हाथ बढ़ाएं, नया सवेरा लेकर आएं।