वनों की फरियाद

वनों की फरियाद कविता प्रकृति की पीड़ा, पेड़ों की अहमियत और मानव द्वारा किए जा रहे विनाश की कहानी कहती है। यह हरियाली बचाने की पुकार है।

न कर छेड़खानी तू धरती से प्यारे,
ये पेड़ हैं जीवन के सच्चे सहारे।
नदियों की धारा, पवन की रवानी,
सब कहते हैं — “मत कर बेइमानी।”

हरियाली ओढ़े ये धरती सुहानी,
तेरे ही कल की है ये राजधानी।
फूलों की हँसी, पंछियों की ज़बानी,
चुपचाप कहती है — “न कर मनमानी।”

जब तूने काटे वन, उजाड़े पहाड़,
प्रकृति ने दिखाए अपने विकराल वार।
सूखा, बाढ़, आँधी, जलती धूप,
ये उसके आँसू हैं, उसका है रूप।

साँसें भी थमने लगीं हैं अब धीरे,
गरम हो रही हैं हवाएँ क़सके घेरे।
ये तूफ़ान, ये धुंध, ये बीमारियाँ,
तेरी ही करतूतों की हैं कहानियाँ।

अब भी समय है, रुक जा ज़रा,
लगा दे हर कोने में हरियाली का तारा।
संभाल ले इस घर को, सहेज ले जीवन,
वरना खो देगा सबकुछ तू एक दिन।

न कर छेड़खानी इस प्रकृति से यार,
ये ही तेरा कल है, यही तेरा संसार।


प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Read Also:

काश.! मैं बन जाऊँ वृक्ष

काश.! मैं बन जाऊँ वृक्ष

"काश! मैं बन जाऊँ वृक्ष" कविता में लेखक वृक्ष बनने की कामना करता है, जो बिना भेदभाव सबको फल, फूल, छाया और प्रेम देता है।
धूप में खेलें हम सब

धूप में खेलें हम सब

धूप में खेलें हम सब, सुनहरा संसार, हर्षित मन, उज्ज्वल तन, खुला आसमान अपार। गेंद, गुल्ली, कबड्डी की, बच्चों की भरमार, सूरज दादा की किरणें,...
होली पर बाल कविता

होली पर बाल कविता

होली पर बाल कविता (Holi Par Bal Kavita) होली आई, होली आई।रंग बिरंगी होली आई।धूम मचाती होली आई।घर घर में खुशियां लाई।बच्चों की यह टोली...
गिनती का जादू

गिनती का जादू

एक, दो, तीन, चार, गिनती का जादू सार, पांच, छह, सात, आठ, गणित की यह है बात। नौ, दस, ग्यारह, बारह, संख्याओं का यह प्यारा...
मछ्ली जल की रानी है – Fish Queen Poem

मछ्ली जल की रानी है – Fish Queen Poem

मछ्ली जल की रानी है मछ्ली जल की रानी है जीवन उसका पानी है हाथ लगाओ तो डर जाएगी बाहर निकालो तो मर जाएगी पानी...
प्रकृति का प्रश्न

प्रकृति का प्रश्न

प्रकृति बिना इंसान के भी संपूर्ण थी। यह कविता हमें प्रकृति के स्वाभाविक सौंदर्य और मनुष्य की भूमिका पर सोचने को मजबूर करती है।
मेरा प्रश्न

मेरा प्रश्न

यह कविता एक ऐसे मुसाफ़िर की कहानी है जो शोर, भीड़ और प्रश्नों से जूझते हुए अंततः खुद को मौन में खोज निकालता है। आत्ममंथन...