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डॉ. मुल्ला आदम अली

डॉ. मुल्ला आदम अली हिंदी साहित्य के समर्पित रचनाकार हैं, जिनकी लेखनी में जीवन की सच्चाइयों, मानवीय संवेदनाओं और समाज के विविध रंगों का सुंदर चित्रण मिलता है। tinytaleshub.com पर डॉ. साहब अपनी कहानियों और कविताओं के माध्यम से पाठकों के हृदय को छूने वाले विचार प्रस्तुत करते हैं। प्रकाशित कृतियाँ : “मेरी अपनी कविताएं” “हिंदी कथा-साहित्य में देश-विभाजन की त्रासदी और सांप्रदायिकता” “युग निर्माता प्रेमचंद और उनका साहित्य”, 24 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लेख प्रकाशित, 30 से ज्यादा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में भाग लिया गया है, कई पत्र-पत्रिकाओं में कहानियां और कविताएं प्रकाशित। वे 24 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं, 30 से ज्यादा सेमिनारों में भाग ले चुके हैं और उनकी अनेक रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। सम्मान व पुरस्कार: एंटी करप्शन फाउन्डेशन द्वारा “नेशनल एजुकेशन आइकन अवार्ड – 2019” सोसाइटी फॉर यूथ डेवलपमेंट द्वारा “स्वामी विवेकानंद युवा सम्मान – 2019”, विश्व संवाद परिषद की ओर से हिंदी साहित्य एवं काव्य सभा (प्रकोष्ठ) के लिए अवैतनिक प्रदेश अध्यक्ष (आंध्र प्रदेश) 2021. TinyTalesHub.com पर योगदान: यहाँ पर डॉ. मुल्ला आदम अली की कविताएं और कहानियाँ आपके दिल को छूने वाली भावनाओं, प्रेरणा और सच्चे जीवन अनुभवों से भरी होती हैं। उनकी रचनाएँ सरल शब्दों में गहरी भावनाओं को व्यक्त करती हैं।

डॉ. मुल्ला आदम अली के लेख

  • काश.! मैं बन जाऊँ वृक्ष

    काश.! मैं बन जाऊँ वृक्ष

    "काश! मैं बन जाऊँ वृक्ष" कविता में लेखक वृक्ष बनने की कामना करता है, जो बिना भेदभाव सबको फल, फूल, छाया और प्रेम देता है।
  • फूलों की खिलखिलाहट

    फूलों की खिलखिलाहट

    फूलों की खिलखिलाहट और प्रकृति की मुस्कान पर एक दिल छू लेने वाली कविता, जो हमें पेड़ों, नदियों और हर जीव की अहमियत याद दिलाती...
  • नीम का पेड़

    नीम का पेड़

    नीम का पेड़ सिर्फ छांव ही नहीं देता, बल्कि यह हमें स्वास्थ्य, सादगी और पर्यावरण प्रेम का भी पाठ पढ़ाता है। इस कविता में जानें...
  • हमारा पर्यावरण

    हमारा पर्यावरण

    हमारा पर्यावरण कविता में धरती, पेड़-पौधों और स्वच्छता के महत्व को सरल और आकर्षक शब्दों में प्रस्तुत किया गया है।
  • प्रदूषण है शैतान

    प्रदूषण है शैतान

    'प्रदूषण है शैतान' एक शिक्षाप्रद कविता है जो बच्चों को पर्यावरण, स्वच्छता और प्रदूषण से लड़ने के लिए प्रेरित करती है।
  • सवेरे की सौगात

    सवेरे की सौगात

    यह कविता "सवेरे की सौगात" सुबह की प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और आशाओं से भरे नए दिन का कोमल चित्रण प्रस्तुत करती है।
  • प्रकृति का प्रश्न

    प्रकृति का प्रश्न

    प्रकृति बिना इंसान के भी संपूर्ण थी। यह कविता हमें प्रकृति के स्वाभाविक सौंदर्य और मनुष्य की भूमिका पर सोचने को मजबूर करती है।
  • वनों की फरियाद

    वनों की फरियाद

    वनों की फरियाद कविता प्रकृति की पीड़ा, पेड़ों की अहमियत और मानव द्वारा किए जा रहे विनाश की कहानी कहती है। यह हरियाली बचाने की...
  • बूढ़े पेड़ का दुख

    बूढ़े पेड़ का दुख

    "मैं बूढ़ा हूँ, पर जीवित हूँ..." — एक संवेदनशील कविता, जो एक पेड़ के माध्यम से जीवन, स्मृतियों और उपेक्षा की कहानी बयाँ करती है।