प्रदूषण है शैतान
‘प्रदूषण है शैतान’ एक शिक्षाप्रद कविता है जो बच्चों को पर्यावरण, स्वच्छता और प्रदूषण से लड़ने के लिए प्रेरित करती है।
काला धुआँ, कूड़े के ढेर,
सांसें रुके, दुखी है शहर।
पानी गंदा, हवा भी भारी,
प्रदूषण ने मुसीबत डाली।
पेड़ कटे, धूप ज़्यादा आई,
धरती मां ने चिंता जताई।
गाड़ियाँ दौड़ीं धुएं से भरी,
खुशियाँ सबकी लगती फीकी।
नदी बोली – “मत मुझमें फेंको,
प्लास्टिक, तेल, कूड़ा-धोको।”
हवा बोली – “मुझे बचाओ,
पेड़ लगाओ, प्यार बढ़ाओ।”
बच्चे बोले – “हम हैं तैयार,
करेंगे धरती से सच्चा प्यार।”
कूड़ा फेंकेंगे डिब्बे में,
साइकिल चलाएँगे मन के जी में।
प्रदूषण को दूर भगाएँगे,
धरती को फिर हरा बनाएंगे।
साफ-सुथरी हो दुनिया सारी,
खुश हो जाए हर जन-न्यारी।












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