मेरा सफ़र: ज़िंदगी की प्रेरक कविता

एक रास्ता अकेला सफर एक प्रेरणादायक हिन्दी कविता है जो जीवन की कठिनाइयों और सुंदर पलों को साथ लेकर चलने की सीख देती है।

safar

आओ चलें हम एक रस्ते अकेले,
हो राह काँटो की ,फिज़ा फूलों भरी,
लंबा सफ़र,मंजिल अधूरी है अभी,
चलते चलें हम राह हँसते खेलते।
हो मस्त जुन्हाई लगे छाँव कभी,
जो आसमां आए तले पाँव कभी,
रस्ता बड़ा लंबा ,सफ़र है अकेला,
मैं तो अकेले ही चला गाँव कभी।
आए मुसाफ़िर इस जमीं तो पाक पर,
पर साथ ना कोई चलें इस राह पर,
कुछ तो कहे सहना हुआ मुश्किल अभी,
कुछ लौट आए ,कुछ बढ़े इक आह पर।
सोए हुए गुमनाम महलों से हुए,
रण में लड़े जो ,नाम उनके ही हुए।

✍️ यह रचना हमें
पंकज कुमार (सफ़र)
द्वारा प्राप्त हुई है।
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