अप्रैल फूल
यह अप्रैल फूल कविता बच्चों और बड़ों के लिए समान रूप से रोचक है, जिसमें हास्य, शरारत और सरल भाषा का मेल देखने को मिलता है।
मार्च को फूल बनाया,
एक अप्रैल आया।
हाथी बोला कौए जी,
कोयल सा मीठा गाते।
इस संगीत सभा में तुम,
फिर क्यों न गीत सुनाते।
ऐसा सुनकर कौआ तब,
काँव काँव कर चिल्लाया,
कौए को फूल बनाया।
एक अप्रैल आया।।
कहा गधे से बन्दर ने,
कल होगी मेरी शादी।
जरूर आना दावत में,
नहीं भूलना हां जी।
गया गधा बन्दर के घर,
अप्रैल फूल लिखा पाया,
गधे को फूल बनाया।
एक अप्रैल आया।।












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