हे कृष्ण तुम्हें पुकारें: कृष्ण पर एक भावुक हिंदी कविता

इस हिंदी कविता में, कृष्ण को पुकारा गया है कि वे फिर से आकर भटके हुए मानवों को राह दिखाएं। पढ़ें और महसूस करें भगवान कृष्ण की दिव्यता।

हे कृष्ण - Poem

हे कृष्ण तुम्हें पुकारें
इक बार चले आओ
भूले हुए हैं राहें
फ़िर राह दिखा जाओ!

फ़िर कर्म से विमुख हो,
मानव भटक रहा है
माया के जाल में ही
मूरख अटक रहा है
तुम आओ फ़िर से मोहन
निर्मोही बना जाओ…
भूले हुए राहें
फ़िर राह तो दिखाओ!!

नारी की अस्मिता के,
हर सू लुटेरे हैं अब,
पापी दुशासनो के
हर सू बसेरे हैं अब..
फ़िर चक्र अपना केशव….
इक बार तुम चलाओ !!
भूलें हुए हैं राहें
फ़िर राह तुम दिखाओ !!!

इस देश की धरा फिर असुरों से तप्त होती,
फ़िर से तुम्हारे अर्जुन की, बुद्धि भ्रमित होती..
हे कृष्ण सारथी बन, फ़िर से उसे जगाओ
भूले हुए हैं राहें
फ़िर राह दिखाओ
हे कृष्ण प्यारे मोहन….
फ़िर एक बार आओ…
फ़िर एक बार आओ!!!

यह कविता एक भावपूर्ण निवेदन है जो भगवान श्रीकृष्ण को संबोधित करती है। इसमें कवि मौजूदा समय की चुनौतियों और समस्याओं का जिक्र करते हुए, कृष्ण से आग्रह करता है कि वे एक बार फिर इस संसार में अवतरित हों और भटके हुए लोगों को सही मार्ग दिखाएं।

कविता में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि किस तरह मानव अपने कर्म से विमुख होकर, माया के जाल में फँस गया है और उसकी बुद्धि भ्रमित हो चुकी है। नारी की अस्मिता के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए, कवि उन लुटेरों और पापियों की बात करता है जो समाज में हर जगह फैले हुए हैं। ऐसे समय में, कृष्ण के चक्र का प्रतीकात्मक प्रयोग करते हुए, कवि उनसे आग्रह करता है कि वे एक बार फिर से इन असुरों का नाश करें।

कविता महाभारत की घटनाओं का संदर्भ देती है, जैसे अर्जुन की भ्रमित स्थिति, और भगवान कृष्ण से अनुरोध करती है कि वे फिर से सारथी बनकर उसे सही राह दिखाएं। यह कविता एक प्रकार की प्रार्थना है, जो कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर और भी अधिक प्रासंगिक हो जाती है। यह पाठकों को भगवान कृष्ण की दिव्यता और उनकी शक्ति की याद दिलाती है, और उन्हें सही राह पर चलने के लिए प्रेरित करती है।

#जन्माष्टमी

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