कौवों की गिनती – तेनालीराम की अद्भुत कहानी
‘कौवों की गिनती’ एक प्रसिद्ध तेनालीराम कहानी है जिसमें महाराज कृष्णदेवराय के मुश्किल सवाल पर तेनालीराम अपनी अद्भुत चतुराई और हाज़िरजवाबी से सभी को हैरान कर देते हैं।
विजयनगर के महाराज कृष्णदेवराय को दरबार में कभी-कभी अनोखे सवाल पूछने का बड़ा शौक था, और उनके इन सवालों का सबसे मज़ेदार लक्ष्य तेनालीराम हुआ करते थे। महाराज जानते थे कि तेनालीराम हर मुश्किल का जवाब ऐसे देंगे कि आधा दरबार हैरान रह जाएगा।
एक दिन महाराज अपने सभी दरबारियों के साथ शाही बागीचे में टहल रहे थे। उसी वक्त कौवों का एक झुंड आसमान में गुजरा। उस झुंड को देखकर महाराज को एक सवाल सूझा। उन्होंने मुस्कुराते हुए तेनालीराम से कहा — “तेनाली, क्या तुम बता सकते हो कि हमारे राज्य में कुल कितने कौवे हैं?”
तेनालीराम ने उत्तर दिया — “ज़रूर महाराज! मैं बता सकता हूँ।”
महाराज ने भौंहें उठाईं — “अच्छा, लेकिन गिनती एकदम सटीक होनी चाहिए। अगर ज़रा-सी भी गलती हुई तो दंड के लिए तैयार रहना।”
तेनालीराम ने विनम्रता से कहा — “आप जो भी दंड दें, स्वीकार है महाराज। मैं अपने उत्तर पर पूरा विश्वास रखता हूँ।”
वहाँ मौजूद अन्य दरबारियों के चेहरों पर खुशी छा गई — उन्हें लग रहा था कि आज तेनाली की खैर नहीं।
महाराज ने आदेशात्मक स्वर में कहा — “तो बताओ, कितने कौवे हैं हमारे राज्य में?”
तेनाली ने बिना किसी हिचक के जवाब दिया — “महाराज, कुल एक लाख बीस हज़ार पाँच सौ पचास कौवे हैं।”
महाराज चौंक पड़े — “इतने कौवे? तुम इतनी निश्चितता से कैसे कह सकते हो?”
तेनाली हाथ जोड़कर बोले — “महाराज, यदि आपको संदेह हो तो गिनती करवा लीजिए। संख्या बिल्कुल यही मिलेगी।”
महाराज ने थोड़ा मुस्कुराते हुए पूछा — “और यदि गिनने पर संख्या अधिक या कम निकली तो?”
तेनाली ने अत्यंत गंभीरता से कहा — “यदि संख्या कम हुई, तो समझ लीजिए कि हमारे राज्य के कुछ कौवे अपने रिश्तेदारों से मिलने दूसरे राज्यों की यात्रा पर गए हैं… और यदि संख्या अधिक निकली, तो निश्चय ही पड़ोसी राज्यों के कुछ कौवे अपने परिवारजनों से मिलने यहाँ उपस्थित हैं।”
यह सुनते ही सभी दरबारी ठहाका लगाकर हँस पड़े। महाराज भी मुस्कुराए बिना रह न सके। वहीं दूसरी ओर तेनाली के विरोधियों के चेहरे लटक गए क्योंकि एक बार फिर तेनालीराम अपनी चतुराई से बाज़ी जीत चुका था












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