बीरबल और जादुई लकड़ी
“बीरबल और जादुई लकड़ी” में पढ़िए कैसे बीरबल ने एक चालाक योजना से असली चोर को पकड़ा। यह कहानी सिखाती है— बुद्धि ही असली शक्ति है।
एक बार की बात है। एक व्यापारी अपने किसी ज़रूरी काम से कुछ दिनों के लिए प्रदेश से बाहर गया हुआ था। जब वह वापस लौटा और घर पहुँचा, तो उसने देखा कि उसकी तिजोरी पूरी तरह खाली है। उसकी बरसों की कमाई गायब थी!
यह देखकर व्यापारी के होश उड़ गए। उसने तुरंत अपने पाँचों नौकरों को बुलाया। जब सब उसके सामने उपस्थित हुए तो वह गुस्से में बोला – “मेरे घर में इतनी बड़ी चोरी कैसे हो गई..तुम लोग क्या कर रहे थे?”
एक नौकर बोला – “मालिक, हमें बिल्कुल नहीं पता कि यह चोरी कब हुई। हम तो उस वक्त सो रहे थे।”
नौकर की बात सुनकर व्यापारी और भी भड़क उठा – “सब बहाने हैं। मुझे पूरा यकीन है कि तुम पाँचों में से कोई एक ही असली चोर है! इसका फैसला अब बादशाह अकबर ही करेंगे।”
यह कहकर व्यापारी सीधे अकबर के दरबार में पहुँचा।
बादशाह अकबर दरबार में जनता की समस्याएं सुन रहे थे कि तभी व्यापारी ने आकर कहा – “हुजूर, मुझे न्याय चाहिए! मेरी तिजोरी लूट ली गई है।”
अकबर ने शांत स्वर में पूछा – “कौन हो तुम? कितना सामान चोरी हुआ, कब चोरी हुआ— सारी बात विस्तार से बताओ”
फिर व्यापारी ने सारी बात बताई। बादशाह अकबर कुछ देर सोचकर बोले – “ठीक है, इस मामले की जाँच बीरबल करेंगे।”
अगले दिन बीरबल व्यापारी के घर पहुँचे। उन्होंने सभी नौकरों को बुलाकर पूछा – “बताओ, चोरी की रात तुम लोग कहाँ थे?”
सभी ने एक ही जवाब दिया — “हुजूर, हम सब घर पर ही थे और सो रहे थे।”
यह सुनकर बीरबल ने सिर हिलाया और कहा – “ठीक है। मेरे पास पाँच जादुई लकड़ियाँ हैं। मैं तुम सबको एक-एक लकड़ी दूँगा। अब चूँकि यह जादुई लकड़ी है इसलिए तुम पाँचों में से जो कोई भी चोर होगा, उसकी लकड़ी आज रात दो इंच लंबी हो जाएगी..और फिर कल सुबह जाँच में जिसकी लकड़ी बड़ी निकलेगी वही चोर होगा।”
इतना कहकर बीरबल ने सबको लकड़ियाँ बाँटी औरं वहाँ से चले गए। अगली सुबह जब वे लौटे, तो सभी नौकर अपनी लकड़ियों के साथ सामने आ खड़े हुए। बीरबल ने ध्यान से देखा और मुस्कुरा दिए— एक नौकर की लकड़ी बाकियों से दो इंच छोटी थी!
बीरबल ने तुरंत सिपाहियों को इशारा किया – “इसे पकड़ लो, यही असली चोर है।”
यह सब देख व्यापारी हैरान रह गया। उत्सुकतावश उसने बीरबल से पूछा – “लेकिन हुजूर, ये कैसे तय हो गया? आप इतने यकीन से कैसे कह रहे हैं कि यही चोर है?”
बीरबल ने मुस्कुराते हुए कहा – व्यापारी महोदय, सारा खेल इस लकड़ी के टुकड़े का है। दरअसल इन लकड़ियों में कोई जादू नहीं था। लेकिन जैसा कि मैंने कहा था कि जिसने चोरी की होगी उसकी लकड़ी रात को अपने आप दो इंच बड़ जाएगी। चोर को इसी बात का डर था इसीलिए उसने रात को अपनी लकड़ी दो इंच काट ली, ताकि अगली सुबह उसकी लकड़ी भी बाकियों की लकड़ी के बराबर लगे। और उसकी यही गलती उसके पकड़े जाने का कारण बन गयी।
व्यापारी बीरबल की बुद्धि देखकर दंग रह गया। उसने बीरबल को सहायता करने के लिए धन्यवाद दिया और फिर चोर के घर जाकर अपना सारा सामान वापस ले आया।












One reply on “बीरबल और जादुई लकड़ी”
हरे-भरे जंगल में एक छोटा सा बंदर रहता था। उसका नाम बोलू था।
बोलू बाकी बंदरों से अलग था। वह ज्यादा शरारती नहीं, बल्कि बहुत सोचने वाला और भावुक था।
अक्सर वह पेड़ की टहनी पर बैठकर दूर आसमान को देखता रहता।
Narration:
“हर जंगल में शोर होता है…
लेकिन बोलू के दिल में सन्नाटा था।”