सोने का अंडा देने वाली मुर्गी – लालच पर कहानी

सोने का अंडा देने वाली मुर्गी की कहानी एक गरीब किसान की है जो लालच में मुर्गी को मार देता है और अपनी किस्मत खो देता है। यह कहानी हमें सिखाती है कि लालच हमें बर्बाद कर देता है।

एक गाँव में एक गरीब किसान अपनी पत्नी के साथ एक टूटी-फूटी झोपड़ी में रहता था। उनके पास थोड़ी बहुत जमीन थी, जिससे मुश्किल से पेट भरता था। घर में एक-दो बकरियों के अलावा कोई और जानवर भी नहीं था। दोनों की जिंदगी बहुत कठिनाई में गुजर रही थी।

एक दिन किसान काम से लौटते हुए जंगल के रास्ते से गुजर रहा था। शाम का समय था। सूरज ढल रहा था और पंछी अपने घोंसलों को लौट रहे थे। चलते-चलते उसकी नजर झाड़ियों में छिपी एक मुर्गी पर पड़ी। मुर्गी दुबली-पतली थी। जब किसान ने इधर-उधर देखा तो पाया कि आसपास कोई नहीं था।

“यह मुर्गी किसी की पालतू तो नहीं लगती। अगर मैं इसे घर ले जाऊँ तो यह रोज अंडे देगी जिन्हें बेचकर कुछ पैसे तो मिल ही जाएँगे”– ऐसा सोचकर वह मुर्गी को पकड़कर घर ले आया। किसान की पत्नी मुर्गी को देखकर बहुत खुश हुई।

अगली सुबह जब दोनों सोकर उठे और मुर्गी की तरफ देखा, तो उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं। मुर्गी ने जो अंडा दिया था वह कोई साधारण अंडा नहीं था, बल्कि एक चमचमाता हुआ सोने का अंडा था। किसान और उसकी पत्नी खुशी से झूम उठे। वे दोनों समझ गए थे कि यह कोई साधारण मुर्गी नहीं है, बल्कि सोने का अंडा देने वाली चमत्कारी मुर्गी है।

अगली सुबह फिर मुर्गी ने एक सोने का अंडा दिया। उसके अगले दिन भी यही हुआ। इसी तरह दिन बीतते गए। वह मुर्गी रोज सुबह एक सोने का अंडा देती थी जिसे बेचकर किसान को अच्छा-खासा धन मिल रहा था। उसकी गरीबी अब धीरे-धीरे दूर होने लगी थी…लेकिन समय के साथ, किसान और उसकी पत्नी लालची होने लगे। पत्नी अक्सर किसान से कहती थी- “सुनते हो, यह मुर्गी हमें रोजाना केवल एक ही अंडा देती है। अगर रोज पाँच-दस अंडे देती तो हम अबतक बहुत अमीर बन चुके होते।”

किसान को भी अपनी पत्नी की बात सही लगती थी। धीरे-धीरे दोनों का लालच बढ़ने लगा। ऐसे ही अचानक एक दिन दोनों को विचार आया कि यदि मुर्गी रोज एक सोने का अंडा देती है तो उसके भीतर कितने सारे सोने के अंडे होंगे। उन्होंने सोचा कि क्यों न मुर्गी का पेट काटकर एक बार में ही सारे अंडे निकाल लिए जाएँ! 

जल्दी अमीर बनने की ख्वाहिश में किसान और उसकी पत्नी को सही-गलत का भी ध्यान नहीं रहा। लालच में अंधे हो चुके किसान ने मुर्गी को पकड़ा और चाकू से उसका पेट काट डाला। किंतु मुर्गी भीतर से सामान्य मुर्गियों की तरह ही थी। उसके पेट में सोने के अंडे नहीं थे। दोनों निराश होकर एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे। उन्हें अपनी मूर्खता पर अफसोस हो रहा था। किसान जमीन पर बैठ गया और सिर पकड़कर रोने लगा। जल्दी अमीर बनने के लालच में उसने सोने का अंडा देने वाली मुर्गी को हमेशा के लिए खो दिया था।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि लालच इंसान को अंधा कर देता है। जितना है उसमें संतुष्ट रहना ही असली सुख है, अन्यथा लालच हमें वो भी खोने पर मजबूर कर देता है जो पहले से हमारे पास होता है।

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