दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

“दिन जल्दी-जल्दी ढलता है” कविता समय के बहाव, आत्मचिंतन और परिवार के प्रतीक्षा भाव को सुंदर तरीके से दर्शाती है।

हो जाए न पथ में रात कहीं,

मंजिल भी तो है दूर नहीं-

यह सोच थका दिन का पंथी भी जल्दी-जल्दी चलता है!

दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

 

बच्चे प्रत्याशा में होंगे,

नीड़ों से झाँक रहे होंगे-

यह ध्यान परों में चिड़ियों के भरता कितनी चंचलता है!

दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

 

मुझसे मिलने को कौन विकल?

मैं होऊँ किसके हित चंचल?

यह प्रश्न शिथिल करता पद को, भरता उर में विह्वलता है!

दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

 

“दिन जल्दी-जल्दी ढलता है” हरिवंश राय बच्चन की एक प्रसिद्ध रचना है, जो समय की तेज़ी से गुजरती रफ्तार और जीवन की क्षणभंगुरता को उजागर करती है। इस कविता में कवि हमें यह संदेश देते हैं कि समय कभी नहीं रुकता, इसलिए हमें इसका सदुपयोग करना चाहिए। वे यह भी बताते हैं कि हमें अपने लक्ष्यों की ओर सतत प्रयास करते हुए, समय रहते उन्हें प्राप्त करने की कोशिश करनी चाहिए।

 


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