जिस जिससे पथ पर स्नेह मिला…

यह कविता उन रिश्तों की कृतज्ञता है, जो राह में साथ चले।

“जिस जिससे पथ पर स्नेह मिला” – रिश्तों और यादों की कोमल अभिव्यक्ति
सफर में मिले वो अजनबी जो हमारे दिल को छू गए, भले ही कुछ पल के लिए। इस कविता में वही कृतज्ञता, वही स्मृति भावनाओं के रंग बिखेरती है।

जिस जिससे पथ पर स्नेह मिला
उस उस राही को धन्यवाद।

जीवन अस्थिर अनजाने ही
हो जाता पथ पर मेल कहीं
सीमित पग-डग, लम्बी मंज़िल
तय कर लेना कुछ खेल नहीं

दाएँ-बाएँ सुख-दुख चलते
सम्मुख चलता पथ का प्रमाद
जिस जिससे पथ पर स्नेह मिला
उस उस राही को धन्यवाद।

साँसों पर अवलम्बित काया
जब चलते-चलते चूर हुई
दो स्नेह-शब्द मिल गए, मिली
नव स्फूर्ति थकावट दूर हुई

पथ के पहचाने छूट गए
पर साथ-साथ चल रही याद
जिस जिससे पथ पर स्नेह मिला
उस उस राही को धन्यवाद।

जो साथ न मेरा दे पाए
उनसे कब सूनी हुई डगर
मैं भी न चलूँ यदि तो भी क्या
राही मर लेकिन राह अमर
 इस पथ पर वे ही चलते हैं
जो चलने का पा गए स्वाद
जिस जिससे पथ पर स्नेह मिला
उस उस राही को धन्यवाद।कैसे चल पाता यदि न मिला
होता मुझको आकुल-अन्तर
कैसे चल पाता यदि मिलते
चिर-तृप्ति अमरता-पूर्ण प्रहरआभारी हूँ मैं उन सबका
दे गए व्यथा का जो प्रसाद
जिस जिससे पथ पर स्नेह मिला
उस उस राही को धन्यवाद।


प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Read Also:

दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

"दिन जल्दी-जल्दी ढलता है" कविता समय के बहाव, आत्मचिंतन और परिवार के प्रतीक्षा भाव को सुंदर तरीके से दर्शाती है।
मधुशाला

मधुशाला

हरिवंश राय बच्चन की "मधुशाला" एक भावनात्मक और दार्शनिक कविता है जो जीवन को मधु से जोड़ती है। पढ़िए यह अमर रचना पूरी कविता के...
आओ फिर से दिया जलाएँ

आओ फिर से दिया जलाएँ

अटल बिहारी वाजपेयी की यह कविता हमें निराशा में भी आशा की किरण देखने की प्रेरणा देती है। यह सिर्फ शब्द नहीं, जीवन का संदेश...
एक अजीब दिन

एक अजीब दिन

एक अजीब दिन कविता में कुँवर नारायण बताते हैं कि विश्वास, सच्चाई और आत्मसम्मान के साथ जिया गया दिन ही असली सुख देता है।
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

हरिवंश राय बच्चन की प्रसिद्ध कविता "कोशिश करने वालों की हार नहीं होती" हमें सिखाती है कि आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास से कोई भी लक्ष्य...
खिलौनेवाला  – बचपन और माँ का स्नेह

खिलौनेवाला – बचपन और माँ का स्नेह

खिलौनेवाला कविता बच्चों की मासूम इच्छाओं और खेलों का सुंदर चित्रण करती है। इसमें एक बच्चे का अपनी माँ से भावनात्मक संवाद भी झलकता है।