एक अजीब दिन

एक अजीब दिन कविता में कुँवर नारायण बताते हैं कि विश्वास, सच्चाई और आत्मसम्मान के साथ जिया गया दिन ही असली सुख देता है।

आज सारे दिन बाहर घूमता रहा
और कोई दुर्घटना नहीं हुई।

आज सारे दिन लोगों से मिलता रहा
और कहीं अपमानित नहीं हुआ।

आज सारे दिन सच बोलता रहा
और किसी ने बुरा न माना।

आज सबका यक़ीन किया
और कहीं धोखा नहीं खाया।

और सबसे बड़ा चमत्कार तो यह
कि घर लौटकर मैंने किसी और को नहीं
अपने ही को लौटा हुआ पाया। 

इस कविता में कवि कुँवर नारायण जी बताते हैं कि आज का दिन उनके लिए असाधारण रहा क्योंकि आज न कोई दुर्घटना हुई, न किसी ने उनका अपमान किया, न सच बोलने पर विवाद हुआ और न ही भरोसा करने पर धोखा मिला। अंत में सबसे बड़ा सुकून यही रहा कि घर लौटकर कवि ने खुद को वैसा ही पाया जैसा वह सुबह निकला था- यानी दिन की भागदौड़ और दुनिया की जटिलताओं के बावजूद उसका अस्तित्व और उसका स्वाभिमान सुरक्षित रहा। मूल रूप से कवि यह बतलाना चाहता है की दुनिया में भरोसा, सच्चाई और लोगों के प्रति सम्मान आज भी मौजूद है।

#Editors Choice

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Read Also:

गीत नया गाता हूँ

गीत नया गाता हूँ

गीत नया गाता हूँ अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविताएं में एक प्रेरक कविता है। Hindi ke kavi की यह रचना संघर्ष, आशा और नए...
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

"दिन जल्दी-जल्दी ढलता है" कविता समय के बहाव, आत्मचिंतन और परिवार के प्रतीक्षा भाव को सुंदर तरीके से दर्शाती है।
पथ की पहचान

पथ की पहचान

पथ की पहचान कविता में हरिवंश राय बच्चन ने जीवन की अनिश्चितताओं, सही राह की पहचान और दृढ़ निश्चय की आवश्यकता को मार्मिकता से दर्शाया...