गीत नया गाता हूँ
गीत नया गाता हूँ अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविताएं में एक प्रेरक कविता है। Hindi ke kavi की यह रचना संघर्ष, आशा और नए सवेरे की ऊर्जा को शब्दों में उतारती है।
टूटे हुए तारों से फूटे वासंती स्वर
पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर
झरे सब पीले पात, कोयल की कुहुक रात
प्राची में अरुणिमा की रेख देख पाता हूँ
गीत नया गाता हूँ
टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी
अंतर की चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी
हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा
काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूँ
गीत नया गाता हूँ
जब भी हम Hindi ke kavi का ज़िक्र करते हैं, तो अटल बिहारी वाजपेयी जी का नाम आदर के साथ लिया जाता है। वे केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील कवि भी थे। उनकी रचनाओं में से “Geet Naya Gata Hoon” आज भी सबसे अधिक प्रेरक कविताओं में गिनी जाती है।
इस कविता की पंक्तियाँ – “हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा” – केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन का दर्शन हैं। टूटे हुए सपनों और कठिन परिस्थितियों में भी नया गीत गाने का साहस, यही कविता हमें सिखाती है।
अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविताएं हमें यह एहसास कराती हैं कि जीवन की हर ठोकर के बाद भी एक नई शुरुआत संभव है। जैसे रात के अंधेरे के बाद सूरज की किरणें उगती हैं, वैसे ही संघर्ष के बाद उम्मीद जन्म लेती है।
क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि सब कुछ बिखर जाने के बाद भी भीतर से एक नई ऊर्जा मिलती है? यही जादू इस कविता का है। यह हमें बताती है कि हार मानना विकल्प नहीं, बल्कि संघर्ष से नए गीत रचने ही असली जीत है।
आज भी लाखों लोग जब निराशा में डूबते हैं, तो “Geet Naya Gata Hoon” उन्हें उठने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। यही कारण है कि Hindi ke kavi अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविताएँ सदियों तक याद की जाएंगी।
अगली बार जब जीवन में कठिनाई आए, तो बस याद करें उनकी पंक्तियाँ:
“गीत नया गाता हूँ…”












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