बरसात का मौसम
बरसात का मौसम बच्चों और परिवार के लिए ढेरों हँसी-खुशी की सौगात लाता है। यह कविता उन्हीं पलों को सजीव करती है — चाय, पकौड़े और भीगती यादें।
बरसात – ठंडी हवाओं और मिट्टी की सौंधी खुशबू के साथ आने वाला वो मौसम है, जो हमारे जीवन में नई ताजगी भर देता है। बच्चों के लिए यह मौसम कई हसीन लम्हों की सौगात लेकर आता है।
आईए, बारिश के मौसम की उन यादों को इस कविता के जरिए एक बार फिर से जीते हैं।
भीगी-भीगी सी हवाएँ कुछ कहने लगी हैं,
टिप-टिप गिरती बूँदें मन को बहलाने लगी हैं।
सूरज दादा अब नजर आते हैं बहुत कम,
क्योंकि आ गया है बरसात का मौसम।
रिमझिम बारिश में मन भीगने को बेकरार है,
माँ भी डाँट लगाने को एकदम तैयार है।
बेखौफ होकर फिर भी भीग रहे हैं हम,
क्योंकि आ गया है बरसात का मौसम।
स्कूल जाने निकले हम, रास्ते में कीचड़ की भरमार है,
हमें इससे क्या डर, हम तो पापा की गाड़ी में सवार हैं।
काले रंग की छतरी हमारे साथ रहती है हरदम,
क्योंकि आ गया है बरसात का मौसम।
चाय के प्याले हमारे होंठों पर सजे हैं,
उधर पापा भुट्टे सेंकने में लगे हैं।
माँ भी तल रही है पकौड़े गरमा-गरम,
क्योंकि आ गया है बरसात का मौसम।
रात होते ही बिजली चली जाती है,
तुरंत माँ टॉर्च जलाकर उजाला लाती है।
इसी उजाले में साथ बैठकर भोजन कर रहे हैं हम,
सच कहूँ, खुशियों की यही सौगात लेकर आता है ‘बरसात का मौसम’।












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