दोस्ती की ताकत: शेर और चुहे की कहानी

शेर और चूहे की दोस्ती की यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची दोस्ती में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता। पढ़ें इस प्रेरक कहानी को और जानें कैसे एक छोटा चूहा बड़े शेर का सच्चा मित्र बन गया।

शेर और चुहे की कहानी

एक बार एक घने जंगल में एक शेर रहता था। एक दिन शेर आराम करने के लिए एक पेड़ के नीचे लेट गया। तभी अचानक एक छोटे से चुहे ने उसके पैर में काट लिया। शेर को बहुत गुस्सा आया और उसने चुहे से कहा, “तुझे अपनी मौत बुला ली है, जो जंगल के राजा के पैर में काटने की हिम्मत कर रहा है।”

चुहे ने शेर को चुनौती देते हुए कहा, “दम है तो मुझे पकड़ के दिखा।” शेर चुहे के पीछे दौड़ पड़ा। बहुत दूर भागने के बाद चुहे ने कहा, “रुको शेर भाई।”

शेर ने रुक कर कहा, “क्या हुआ? निकल गई सारी हेकड़ी? मरना ही था तो मुझे इतना क्यों दौड़ाया?”

चुहे ने हंसते हुए कहा, “अगर मैंने तुम्हें नहीं काटा होता तो तुम मेरे पीछे नहीं आते, और अगर मेरे पीछे नहीं आते तो तुम इस जाल में नहीं फंसते। देखो, सर्कस वाले जाल बिछा कर बैठे हैं।”

शेर ने थोड़ा पीछे जाकर देखा तो सचमुच सर्कस वाले जाल बिछाए बैठे थे। शेर ने राहत की सांस ली और कहा, “चुहे भाई, तुमने अपनी जान जोखिम में डालकर मेरी जान बचाई है। आज से तुम मेरे दोस्त हो।”

चुहे ने कहा, “ठीक है, लेकिन मेरी एक शर्त है। यह बात किसी को मत बताना, नहीं तो जंगल के सभी जानवर तुम्हारी हंसी उड़ाएंगे।”

शेर ने वादा किया और कहा, “तुम जब भी किसी मुसीबत में हो, मुझे बुला लेना।”

चुहे ने सहमति जताई और वहां से चला गया। शेर ने शिकारियों पर हमला कर दिया, जिससे वे डर के भाग गए।

शेर और चुहे की दोस्ती गहरी हो गई। एक दिन चुहा अपने बिल में आराम कर रहा था, तभी शेर ने उसे आवाज दी, “दोस्त, चलो जंगल में घूमने चलते हैं।”

चुहा सहमत हुआ और दोनों जंगल में घूमने निकल पड़े। रास्ते में उन्हें एक बिल्ली दिखी। चुहा डर के मारे शेर के पैरों के बीच चलने लगा। बिल्ली ने सोचा कि शेर इसे देखेगा तो अपने पंजों से इसे दबा देगा और फिर मैं इसे खा लूंगी। बिल्ली को शेर के पीछे जाते देख एक कुत्ता भी पीछे चल पड़ा, सोचते हुए कि बिल्ली चुहे को खाएगी और मैं बिल्ली को खा लूंगा।

कुछ और दूर जाने पर एक सियार ने उन्हें देखा और सोचा कि शेर के जाने के बाद मैं इन तीनों को खा जाऊंगा। आगे जाकर एक मगरमच्छ ने भी देखा और सोचा कि सियार सबको खा जाएगा तो मैं उसे पानी में खींचकर खा जाऊंगा।

इन सबको चलते देख एक हाथी ने सोचा कि शेर के डर से सब उसके पीछे चल रहे हैं, मुझे भी चलना चाहिए। इस तरह हाथी भी उनके पीछे चल दिया। धीरे-धीरे पूरे जंगल के जानवर उनके पीछे चलने लगे।

नदी के किनारे पहुंच कर शेर और चुहा विश्राम करने लगे। जब शेर ने पीछे मुड़कर देखा तो पूरे जंगल के जानवर उनके पीछे आ रहे थे।

शेर ने पूछा, “तुम सब हमारे पीछे क्यों आ रहे हो?”

सभी जानवरों ने अपने-अपने कारण बताए। शेर और चुहा हंसने लगे। शेर ने कहा, “एक छोटे से चुहे को खाने के लिए इतने बड़े जानवर लाइन लगाकर चल रहे हैं! यह चुहा तो मेरा दोस्त है। खबरदार किसी ने इसे आंख उठाकर भी देखा तो।”

चुहा बोला, “शेर भाई, रहने दीजिए। मैं तो अपने बिल में ही अच्छा था।”

शेर ने कहा, “नहीं, आज से तुम जहां चाहो घूम सकते हो। अगर इस चुहे को कुछ हुआ तो मैं पूरे जंगल के जानवरों को खा जाऊंगा।”

सभी जानवर डर गए। हाथी ने कहा, “लेकिन महाराज, हम में से आधे जानवर तो शाकाहारी हैं। हम तो समझे थे कि आप कोई सभा करने जा रहे हैं।”

शेर ने कहा, “यह नन्हा चुहा मेरी जान बचाने वाला है। इसे छोटा मत समझो।”

शेर की बात सुनकर सभी जानवरों ने चुहे की तारीफ की और फैसला किया कि आज से वे सभी एक-दूसरे की मदद करेंगे और किसी को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।

इस तरह शेर और चुहे की दोस्ती ने पूरे जंगल को एकता और सहयोग का पाठ पढ़ाया।

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