खुशियों की बहार लाई है राखी
“खुशियों की बहार लाई है राखी” कविता रक्षाबंधन के त्योहार पर भाई–बहन के पवित्र रिश्ते, प्यार और परंपरा को खूबसूरती से दर्शाती है।
रक्षाबंधन की सुबह आई, मानों खुशियों की बहार है छाई,
भाई की कलाई पर सजा दिया है बहन ने अपना प्यार,
लो बांध दिया है बहना ने धागे में लिपटी रिश्तों की अटूट डोर,
संग–संग बीता हंसते–खेलते साथ बचपन दोनों का,
हर सुख दुःख के साथी है यह बहन भाई की जोड़ी,
यह एक ही ऐसा रिश्ता है, जिसमें, वचन भी है, सम्मान भी है,
प्यार भी है और तकरार भी, पर एक दूजे की ढाल भी है,
भाई वो है जो बहना की आँखों में एक आंसू न देख सके,
बहन वो है जो भाई को एक आंच न आते देख सके,
यह रिश्ता भगवान की दिया सबसे प्यारा और न्यारा रिश्ता है,
हर साल इस पर्व पर, मिलती हैं बहनों को भाइयों से खूब प्यारी सौगातें,
बहन अरमानों की थाल सजा कर करती है भाई का अभिषेक।












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