15 अगस्त पर तिरंगा फहराते समय इन नियमों का ज़रूर रखें ध्यान – ये सम्मान की बात है!
15 अगस्त पर तिरंगा फहराते समय किन नियमों का पालन ज़रूरी है? जानें राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और मर्यादा से जुड़ी ज़रूरी बातें।
हर साल 15 अगस्त आते ही पूरा देश गर्व, जोश और एकजुटता के रंग में रंग जाता है। स्कूल हो या कॉलेज, सरकारी दफ्तर हो या कोई गली-मोहल्ला – हर जगह तिरंगा फहराया जाता है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस तिरंगे को हम सलामी देते हैं, उसके पीछे कुछ मर्यादाएँ और नियम भी होते हैं, जिन्हें जानना और मानना हर भारतीय का फर्ज़ है?
तिरंगा सिर्फ एक झंडा नहीं, हमारी आज़ादी, अस्मिता और आत्मसम्मान का प्रतीक है।
तो आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर सिर्फ झंडा न फहराएं – उसे सही तरीके से फहराने की समझ भी साथ लाएं।
जानिए तिरंगा फहराने के ज़रूरी नियम और मर्यादाएँ:
- तिरंगा हमेशा आयताकार होना चाहिए – और उसका अनुपात होना चाहिए 3:2 (लंबाई:चौड़ाई)।
- तीन रंगों की सही क्रम बेहद जरूरी है:
- सबसे ऊपर: केसरिया (हिम्मत और त्याग का रंग)
- बीच में: सफेद, जिसके बीच में 24 तीलियों वाला नीला अशोक चक्र (न्याय और धर्म का प्रतीक)
- नीचे: हरा (हरियाली और जीवन का रंग)
- तिरंगे पर कोई टेक्स्ट, लोगो या डिजाइन प्रिंट नहीं होना चाहिए।
- फटा, गंदा या मटमैला झंडा कभी नहीं फहराना चाहिए। अगर तिरंगा फट जाए या खराब हो जाए, तो उसे सम्मानपूर्वक, एकांत में नष्ट किया जाता है।
- अब तिरंगा आप 24 घंटे फहरा सकते हैं – दिन और रात दोनों में – अगर वह खुले और स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाली जगह पर हो।
- छुट्टी वाले दिन भी तिरंगा फहराना पूरी तरह से मान्य है।
- तिरंगे को कभी भी जमीन या पानी से स्पर्श नहीं करना चाहिए।
- फ्लैगपोस्ट हमेशा अलग और ऊँचा होना चाहिए। किसी अन्य झंडे के साथ एक ही डंडे पर तिरंगा नहीं लगाया जाता।
- बिगुल या राष्ट्रगान की धुन बजने पर ही तिरंगे को फहराना और उतारना चाहिए।
- उतारते समय तिरंगे को धीरे, आदरपूर्वक और सम्मान के साथ फोल्ड करें।
- तिरंगे को फोल्ड करते समय त्रिकोण या तिरछा न मोड़ें – बल्कि सीधा, व्यवस्थित और साफ-सुथरा रखें।
तिरंगा: भावना से जुड़ा एक एहसास
हम सबने बचपन में 15 अगस्त की परेड देखी है, स्कूल के मैदान में भाषण सुने हैं, और झंडा फहरते वक्त आंखों में एक चमक महसूस की है।
वो चमक आज भी उतनी ही सजीव हो सकती है, अगर हम तिरंगे के प्रति अपना सम्मान बनाए रखें।
15 अगस्त सिर्फ एक दिन नहीं, ये हमारी चेतना का उत्सव है।
तो आइए, इस बार जब आप तिरंगा फहराएं, तो उसे बस ऊँचा न करें – उसे अपने दिल में भी ऊँचा रखें।
क्योंकि तिरंगा लहराने से पहले उसका सम्मान समझना ज़रूरी है।












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