डाकू से बने संत – महर्षि वाल्मीकि की अनोखी कहानी

बच्चों के लिए सरल शब्दों में जानिए कैसे डाकू रत्नाकर ने संत बनकर रामायण की रचना की। यह कहानी उन्हें सिखाएगी अच्छाई का रास्ता।

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क्या आप जानते हो कि रामायण लिखने वाले महर्षि वाल्मीकि पहले डाकू हुआ करते थे? लेकिन एक घटना ने उनकी ज़िंदगी पूरी तरह बदल दी। चलो, उनकी ये रोचक कहानी जानते हैं!

रत्नाकर नाम का एक डाकू

बहुत समय पहले की बात है। एक जंगल में रत्नाकर नाम का एक लड़का रहता था। उसे एक भीलनी ने पाला था। भील लोग जंगल में आने-जाने वालों को लूटते थे और रत्नाकर भी बड़ा होकर यही काम करने लगा। वह बहुत ही भयंकर डाकू बन गया था।

एक दिन बदली ज़िंदगी

एक दिन महान संत नारद मुनि उसी जंगल से जा रहे थे। रत्नाकर ने उन्हें पकड़ लिया। नारद मुनि ने उससे एक सवाल पूछा – “क्या तुम्हारा परिवार तुम्हारे साथ इन पापों में भागीदार है?”
रत्नाकर को पूरा यकीन था कि उसका परिवार उसके साथ है। लेकिन जब उसने अपने परिवार से पूछा, तो सबने कहा – “नहीं, पाप तो तुम्हारा है, हमने कुछ नहीं किया!”

यह सुनकर रत्नाकर को बहुत दुख हुआ। उसे समझ आया कि उसने अब तक गलत रास्ता चुना था। उसने नारद मुनि से पूछा, “अब मैं क्या करूं?”

राम नाम से मिली राह

नारद मुनि ने उसे राम नाम जपने को कहा। लेकिन रत्नाकर को राम नाम बोलना मुश्किल लग रहा था। तब नारद मुनि ने कहा, “तुम ‘मरा मरा’ बोलो, वही उल्टा होकर राम बन जाएगा।”
रत्नाकर ‘मरा मरा’ बोलते-बोलते तपस्या में बैठ गया। वह इतना ध्यान में लीन हो गया कि उसके शरीर के ऊपर दीमकों ने मिट्टी की बांबी (गुहा) बना दी। जब उसकी तपस्या से भगवान खुश हुए, तो ब्रह्माजी ने उसे एक नया नाम दिया – वाल्मीकि, क्योंकि वह वाल्मीक (बांबी) से निकले थे।

रामायण की शुरुआत

एक दिन महर्षि वाल्मीकि ने देखा कि एक शिकारी ने दो प्रेमी क्रौंच पक्षियों में से एक को मार दिया। यह देखकर वह बहुत दुखी हुए और उनके मुंह से एक श्लोक निकल पड़ा। यह श्लोक ही रामायण का पहला श्लोक बना।

फिर ब्रह्माजी ने उन्हें रामायण लिखने की प्रेरणा दी – भगवान राम की महान कथा। यही रामायण आज भी दुनिया भर में पढ़ी और सुनी जाती है।

लव-कुश का जन्म

महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में ही माता सीता ने अपने जुड़वां बेटों – लव और कुश को जन्म दिया था। आज भी उस जगह को सीतावनी कहा जाता है, जो उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में है।

सीख :

इस कहानी से हमें सिख मिलती है कि इंसान चाहे कितना भी गलत क्यों न हो, अगर वह सच्चे मन से अपने जीवन को बदलना चाहे, तो भगवान जरूर रास्ता दिखाते हैं।

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