तेनालीराम की चालाकी: दो चोरों को पड़ा भारी सबक
दो शातिर चोर जब तेनालीराम के घर चोरी करने पहुँचे, तो उन्हें मिला मज़ेदार और ज़िंदगीभर याद रहने वाला सबक। पढ़िए ये रोचक हिंदी कहानी।
एक बार की बात है, विजयनगर राज्य में दो चोरों का बड़ा आतंक फैला हुआ था। दोनों इतने चालाक थे कि चुपचाप चोरी करके निकल जाते और कोई उन्हें पकड़ भी नहीं पाता।
कई घर लूटने के बाद एक दिन उन्होंने तेनालीराम के घर चोरी करने का मन बनाया। उसी रात, दोनों चोर तेनालीराम के घर पहुँचे और बगीचे की झाड़ियों में छिपकर तेनालीराम के सोने का इंतजार करने लगे।
रात का भोजन करके तेनालीराम थोड़ी देर टहलने के लिए अपने घर के पीछे स्थित बगीचे में गए। उन्होंने देखा कि बगीचे में लगे पौधे सूखने लगे हैं, उन्हें पानी की सख्त आवश्यकता है। वे पौधों को अच्छी तरह से देख ही रहे थे कि तभी उन्हें झाड़ियों में कुछ सरसराहट की आवाज सुनाई दी। वे तुरंत समझ गए कि झाड़ियों के पीछे चोर छिपे हैं।
थोड़ी देर बाद वे भीतर गए और अपनी पत्नी से ऊँची आवाज में बात करने लगे- “सुनती हो, सुनने में आया है कि राज्य में दो चोरों का बड़ा आतंक है। वे दोनों बड़े चतुर चोर हैं, इसीलिए हमें भी सावधानी बरतनी चाहिए। एक काम करो, तुम सारे सोने और चाँदी के सिक्कों को तथा अपने कीमती आभूषणों को एक बक्से में सुरक्षित रख दो।”
चोरों को सारी बातें स्पष्ट रूप से सुनाई दे रही थीं। इधर तेनालीराम ने इशारे से अपनी पत्नी को चोरों की मौजूदगी का आभास करा दिया। पत्नी तुरंत इशारा समझ गई और तेनालीराम की ही तरह जोर से बोली- “ठीक है, लेकिन इस बक्से को रखेंगे कहाँ?”
थोड़ी देर सोचने के बाद तेनालीराम जोर से बोले- “एक काम करते हैं, बक्से को हम हमारे घर के पीछे जो कुआँ है न, उसमें फेंक देते हैं। इससे हमारा कीमती सामान चोरों से हमेशा सुरक्षित रहेगा।”
यह सुनकर चोर मन ही मन बहुत प्रसन्न हुए। कुछ ही देर बाद तेनालीराम अपनी पत्नी के साथ एक बड़ा-सा बक्सा लेकर बाहर निकले और उसे घर के पीछे स्थित कुएँ में फेंक दिया। दोनों चोर झाड़ियों में छिपे यह सारा दृश्य देख रहे थे।
जैसे ही तेनालीराम घर के भीतर गए, दोनों चोर कुएँ के पास जाकर उसमें से पानी निकालने लगे। सारी रात वे दोनों कुएँ से बाल्टी भर-भरकर पानी निकालते रहे और बगीचे में बहाते रहे…आखिरकार, भोर होने पर उन्होंने जैसे-तैसे बक्सा बाहर निकाला। लेकिन जैसे ही उन्होंने बक्सा खोला, तो पाया कि पूरा बक्सा पत्थरों से भरा हुआ था।
यह देखकर दोनों एक-दूसरे का मुँह ताकने लगे। दोनों समझ गए कि तेनालीराम ने उन्हें मूर्ख बनाया है। फिर क्या था…पकड़े जाने के डर से दोनों चोर वहाँ से भाग निकले।
उधर तेनालीराम खिड़की से यह सारा दृश्य देखकर बड़े आनंदित हो रहे थे। आज उन्होंने दोनों चोरों को अच्छा सबक सिखाया था, साथ ही उनके पौधों को पानी भी मिल गया था।












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