समय का सदुपयोग: पायल और रोहित की प्रेरक कहानी
पढ़ें पायल और रोहित की प्रेरक कहानी जो सिखाती है कि समय का सदुपयोग कैसे सफलता की कुंजी बन सकता है। समय का मूल्य जानिए इस रोचक कहानी से।
पायल और रोहित दोनों भाई–बहन थे। दोनों एक ही कक्षा में पढ़ते थे। स्वभाव से दोनों एकदम विपरीत थे— जहाँ पायल एक मेहनती और समय का मूल्य समझने वाली लड़की थी, वहीं रोहित पढ़ाई से ज़्यादा खेलने में मन लगाता था और अपने कीमती समय की कद्र कभी नहीं करता था।
एक दिन की बात है। पायल अपने कमरे में बैठी कुछ कर रही थी, तभी रोहित वहाँ आया और बोला – “पायल, क्या कर रही हो?”
पायल ने जवाब दिया – “गायत्री मैम ने जो प्रोजेक्ट दिया है न, वही पूरा कर रही हूँ। तूने बना लिया क्या?”
रोहित हँसते हुए बोला – “अरे अभी कहाँ! अभी तो मेरे खेलने का टाईम है। प्रोजेक्ट तो मैं बाद में तैयार कर लूँगा। फिलहाल मैं क्रिकेट खेलने जा रहा हूॅं।”
इतना कहकर रोहित बल्ला उठाकर दोस्तों के साथ बाहर खेलने चला गया। एक तरफ जहाँ पायल बिना समय गँवाए पूरी मेहनत से अपना प्रोजेक्ट तैयार कर रही थी, वहीं रोहित खेलने में ही मग्न रहता था। प्रोजेक्ट बनाने पर उसका ध्यान ही नहीं था।
दो दिन ऐसे ही बीत गए। प्रोजेक्ट जमा करने का आखिरी दिन आ पहुँचा। कल प्रोजेक्ट सबमिशन होना था। शाम को पापा हॉल में बैठकर पायल का प्रोजेक्ट देख रहे थे, तभी रोहित खेलकर घर लौटा। पापा ने उसे देखकर कहा – “अरे रोहित, देख तेरी बहन ने कितना बढ़िया प्रोजेक्ट तैयार किया है। तू भी अपना प्रोजेक्ट लेकर आ…पता तो चले आखिर दोनों में से किसका प्रोजेक्ट ज्यादा बेहतर है।”
पापा की यह बात सुनकर रोहित हकलाते हुए बोला – “प..पापा, मैंने तो अभी तक शुरू ही नहीं किया।”
यह सुनते ही पापा गुस्से में आ गए। उन्होंने रोहित को खूब डाँट लगाई। पापा की डाँट से वह उदास हो गया। उस रात आनन–फानन में पायल की मदद लेकर उसने किसी तरह अपना प्रोजेक्ट पूरा किया। अगले दिन जब प्रोजेक्ट सबमिशन हुआ तो पायल को पूरे 10 में से 10 अंक मिले, जबकि रोहित को केवल 3। कक्षा में सबसे कम अंक उसे ही प्राप्त हुए थे। लेकिन रोहित को इस बात का जरा भी दुख नहीं था।
कुछ हफ़्ते ऐसे ही बीत गए। एक दिन कक्षा अध्यापिका ने सूचना देते हुए बच्चों से कहा – “बच्चों, अगले हफ़्ते से तुम्हारी परीक्षा शुरू हो रही है। सब मन लगाकर पढ़ाई करना और अच्छे अंक लाना।”
इसके बाद अध्यापिका द्वारा परीक्षा का टाइम टेबल भी जारी कर दिया गया। घर पहुँचकर पायल और रोहित ने पापा को यह बात बताई। पापा ने भी उन्हें अपने समय को पढ़ाई में लगाने की सलाह दी। इसके बाद दोनों बच्चों की परीक्षा की तैयारी शुरू हो जाती है।
पायल रोज तय समय पर बैठकर हर विषय को थोड़ा–थोड़ा पढ़ने लगी। वहीं रोहित ने शुरू के तीन दिन तो बस खेलकूद में ही बिता दिए। फिर जब पापा ने डाँट लगाई तो चौथे दिन से उसने पढ़ाई शुरू की। लेकिन वह केवल वही विषय पढ़ता जो उसे पसंद थे। बाकी समय वह दोस्तों के साथ खेलने में ही गुज़ार देता था। धीरे–धीरे परीक्षा का पहला दिन भी नजदीक आ गया।
कल पहला पेपर था और रोहित अभी भी गली में क्रिकेट खेल रहा था। कुछ देर बाद मौसम अचानक बिगड़ने लगा। तेज हवाएँ चलने लगीं और देखते ही देखते बारिश शुरू हो गई। मम्मी के कहने पर पायल छाता लेकर गई और रोहित को बुलाकर ले आई।
जब रोहित घर आया तो मम्मी ने उसे खूब डाँट लगाई। मम्मी की डाँट का ही असर था कि वह अब पढ़ने को तैयार हो गया, लेकिन जैसे ही वह पढ़ने बैठा वैसे ही बिजली चली गई। सूरज ढल चुका था और चारों ओर अंधेरा छाया हुआ था। आसमान में बिजली कड़क रही थी और बारिश भी थमने का नाम नहीं ले रही थी।
ऐसे में रोहित को अब डर सताने लगा था। डर इस बात का कि अगर लाइट नहीं आई तो वह पढ़ नहीं सकेगा… और नहीं पढ़ा तो पेपर बिगड़ जाएगा। अब उसे वह बीता हुआ सारा वक्त याद आ रहा था जो उसने पढ़ने के बजाय खेलने में व्यर्थ कर दिया था।
कुछ देर बाद पापा घर आए। उन्हें जब पता चला कि लाइट नहीं है तो उन्होंने बिजली विभाग में फोन किया। वहाँ से जानकारी मिलती है कि तेज आँधी और बारिश के चलते पूरे शहर की बिजली बंद है। ठीक होने में सुबह तक का वक्त लग सकता है। जब यह बात रोहित को समझ आई तो वह खूब रोया। कहीं–न–कहीं उसे अपनी गलती का पछतावा भी हो रहा था।
पापा ने रोहित को समझाते हुए कहा – “देखा रोहित, इसलिए मैं हमेशा तुमसे कहता हूँ कि अपना काम समय पर पूरा करो। समय को व्यर्थ मत गवाओ। तुम्हारी बहन ने समय का सदुपयोग किया इसलिए वह कल की परीक्षा को लेकर निश्चिंत है। अगर तुमने भी पहले पढ़ाई की होती तो आज यह परेशानी ही न होती।”
रोहित आँसू भरी आँखों से बोला – “पापा, मुझे अपनी गलती समझ आ गई है। मैं वादा करता हूँ कि अब कभी भी मैं अपना कीमती समय बर्बाद नहीं करूँगा। लेकिन अब मैं क्या करूँ, लाइट है नहीं और कल की परीक्षा को लेकर मैंने कुछ पढ़ाई नहीं की है।”
तभी पायल ने मुस्कुराते हुए कहा – “रोहित, तू चिंता मत कर। मैंने कल का पूरा सिलेबस पढ़ रखा है। मैं तुझे जरूरी–जरूरी सवाल याद करवा देती हूँ। उजाले के लिए हम टॉर्च का इस्तेमाल कर लेंगे।”
इसके बाद पापा ने टॉर्च और मोमबत्तियों की व्यवस्था कर दी। फिर पायल ने अपने भाई को पढ़ाना शुरू किया। इस बार रोहित पूरी लगन से पढ़ाई कर रहा था।
अगले दिन जब परीक्षा हुई तो रोहित का पेपर अच्छा गया। घर लौटकर उसने पापा से कहा – “पापा, आज पायल की वजह से मेरा पेपर अच्छा हुआ। लेकिन अब आगे के लिए मैं आपसे वादा करता हूँ कि अपने समय को कभी भी व्यर्थ कामों में बर्बाद नहीं करूँगा। मैं भी पायल की ही तरह समय का सदुपयोग करना सीखूँगा।”
इतना सुनते ही पापा ने उसे गले लगा लिया। उस दिन के बाद से रोहित सचमुच बदल गया था। उसने खेल के साथ–साथ पढ़ाई को भी महत्व देना शुरू कर दिया था।












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